Saturday, 21 March 2020

अनुशासन पर निबंध essay on anushasan in hindi

अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। अनुशासित व्यक्ति हर किसी को प्रिय लगता  लगता है। अनुशासित व्यक्ति अनेकों लोगों की प्रेरणा का स्त्रोत बनता है। अनुशासित व्यक्ति प्रत्येक क्षण अनुशासन में रहकर अपना कार्य करता है। यदि हम अनुशासन में रहकर अपने कार्य को ना करें।

तो हमारी दिनचर्या खराब हो जाती है। जिसके कारण हमें अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अनुशासित रूप से किया गया कार्य सही फल देता है। और जो कार्य अनुशासन की सीमा से बाहर रहकर किया जाता है। वह किसी न किसी रूप से हानिकारक होता है। यदि हम अनुशासित रूप से हमारे सभी कार्य को करते हैं।

इसका असर हमारे जीवन काल में देखने को मिलता है। अनुशासन में रहकर किया गया कार्य हमें नई राह प्रदान करता है। साथ ही एक अच्छे समाज का निर्माण करता है। जो  व्यक्ति अनुशासन से बाहर रहकर कार्य करते हैं। वह उन  व्यक्तियों की अपेक्षा अपने समय का सदुपयोग नहीं कर पाते हैं। जो कि अनुशासन मैं रहकर अपना कार्य करते हैं। 
जो व्यक्ति अनुशासन में रहकर कार्य नहीं करते है। उन व्यक्तियों की अपेक्षा  ऐसे व्यक्तियों को समाज में अधिक मान सम्मान मिलता है। जो समाज में अनुशासन मैं रहकर कार्य करते हैं  अनुशासन मानव समुदाय में प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। और हमें अपने अनुशासन का पालन करना चाहिए।

इसका मतलब यह नहीं है। कि हम किसी अन्य व्यक्ति को अनुशासन का पालन करके दिखाएं। बल्कि हमें अपनी दिनचर्या तथा कार्य का पालन करते हुए हमें अपने जीवन में अनुशासन का पालन करना चाहिए।

अनुशासन में रहना 
हमें अपने जीवन में अनुशासन का पालन करना चाहिए। जिसके लिए हम कुछ तरीके अपना सकते हैं। 

हमें अपने द्वारा किए कार्य को समय पर संपन्न करना चाहिए। जिससे हमें आने वाले समय में किसी भी परेशानी का सामना ना करना पड़े ।

बेफिजूल कार्यों में अपना समय नहीं बताना चाहिए। अपने कार्य के प्रति ईमानदार रहना चाहिए।

अनुशासन में रखने के लाभ

अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग हैं। अनुशासन में रहने पर हमें अनेकों प्रकार का लाभ होता है। जैसे मान मर्यादा आदि। हमारे लिए अनुशासन कितना महत्वपूर्ण है। इसका पता हम इस बात से लगा सकते हैं। कि यदि सेना का कोई सैनिक अपने कार्य को यदि अनुशासनहीन तरीके से करेगा।

तो इसका कितना घातक परिणाम हो सकता है। इसलिए रक्षा संबंधी क्षेत्रों में अनुशासन को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है। इसी तरह विद्यार्थी जीवन में सफलता का मूल मंत्र अनुशासन है। अनुशासन में  रहकर किया गया अध्ययन सफलता की चाबी है। इसलिए छात्र जीवन में अनुशासन को अधिक महत्व दिया जाता है।

विद्यार्थी जीवन ही नहीं बल्कि मनुष्य को अपने संपूर्ण जीवन में अनुशासन के महत्व समझना चाहिए। और अनुशासन में रहकर ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन में रहकर कार्य करता है। वह व्यक्ति अनुशासनहीन व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा सफल व्यक्ति होता है।

अनुशासन एक और छात्रों के लिए सफलता की राह बनता है। वहीं दूसरी ओर काम करने वाले व्यक्ति के लिए और ऊंचाइयों तक पहुंचने की राह बनता है। यदि हम इन शब्दों को कुछ लाइनों में कहना चाहे तो कह सकते हैं। की अनुशासन व्यक्ति के जीवन में सफलता की राह है। इसी की राह पर चलकर वह अपने जीवन में सफलताओं को छू सकता है।

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कागज की आत्मकथा पर निबंध kagaz ki atmakatha in hindi

हेलो दोस्तों कैसे हैं। आप सभी आज की इस पोस्ट में हम Paper autobiography in hindi के बारे में जानेंगे। paper एक बहुत ही मूल्यवान वस्तु है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम हमारे पूरे दिन की दिनचर्या में ना जाने कितनी बार कागज  का उपयोग करते हैं। कागज प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बच्चे हो या बड़े यह हर किसी के काम आता है। साथ ही यह बच्चे हों या बड़े सबको ज्ञान की प्राप्ति कराता है। बच्चों को यह एक स्कूली शिक्षा के रूप में ज्ञान प्राप्त कराता है। तथा बड़ों को यह धर्म शास्त्रों और ज्ञान ग्रंथों के द्वारा यह ज्ञान की प्राप्ति कराता है। हम दिन भर में ना जाने कितनी बार पेपर का उपयोग करते हैं। चलिए पढ़ते हैं। हमारे द्वारा लिखे गये कागज की आत्मकथा पर निबंध।

मैं कागज हूं। हर पढ़ने लिखने वाले छात्र के में काम आता हूं। देश दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र में मेरा उपयोग किया जाता है। मेरा निर्माण पेड़ों से होता है। पढ़ने लिखने वाले छात्र का मैं हमेशा साथ निभाता हूं। मेरा स्वरूप अनेकों रूप में तैयार किया जाता है। 

जो रूप जिसको भाता है। उसी रूप में वह मुझको पता है। मेरा रूप तैयार हो जाने के बाद मुझे लेखक की कलम के द्वारा सहेजा जाता हैं। और फिर मुझे बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है। जहां पर मेरे जैसी और भी प्रतियां तैयार की जाती हैं।

उन सभी को एकत्रित कर के पुस्तक का रूप दे दिया जाता है। लोग मुझे अपनी आवश्यकता अनुसार मेरा उपयोग करते हैं। बच्चे हों या बड़े हर वर्ग के लोगों के मैं काम आता हूं। स्कूली बच्चों के मैं प्रतिदिन काम आता हूं। वह मुझसे प्रतिदिन कुछ ना कुछ ज्ञान का अर्जुन करते हैं।

साथ ही वह  लेखन के लिए चित्रकारी के लिए मेरा उपयोग करते हैं। मैं प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता हूं। मैं प्रत्येक व्यक्ति को काम आता हूं। साथ ही मैं प्रकृति को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाता हूं। अनेकों व्यक्ति मेरा उपयोग सुबह  उठने से रात को सोने तक मेरा उपयोग करते हैं। 

मैं किसी ना किसी रूप में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़ा हुआ हूं। जमाना भले कितना आगे बढ़ जाए लेकिन मेरा उपयोग निरंतर होता रहेगा। मेरा उपयोग ऑफिसर तथा दफ्तरों में फाइलों के रूप में तथा दुकानदारों के पास मेरा उपयोग सामान पैक करने के रूप में होता है। 

छोटा हो या बड़ा पैकिंग का सामान मैं सबके काम आता  हूं। किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले मेरा उपयोग होता है। शुभ कार्य आमंत्रण पत्र के रूप में मेरा उपयोग किया जाता है। शिक्षा से लेकर दवाई तक मेरा उपयोग होता है। बदलते समय के साथ शिक्षा भले ही  डिजिटल हो जाए लेकिन मेरा उपयोग बंद नहीं होगा।

 मैं किसी न किसी रूप में हमेशा साथ रहूंगा। मैं घर में तमाम रूपों में रहता हूं। जैसे घर  में बने किसी गुलदस्ते के रूप में या घर में लगी किसी फोटो के रूप में रहता हूं। साथ ही किसी ना किसी रूप में मैं घर  की शोभा बढ़ाने का काम करताा हूं। यदि मेरा सदुपयोग किया जाए तो आपके बहुत से काम आ सकता हूं। 

लेकिन मेरा दुरुपयोग किया जाए और मुझे किसी कचरे वाले स्थान पर फेंक दिया जाए तो मैं आपके क्या काम आ सकूंगा। मैं घरों में प्राचीन ग्रंथों पुराणों तथा धार्मिक पुस्तकों के रूप में रहता हूं। बदलते समय के साथ यह जमाना भले ही कितना डिजिटल हो जाए लेकिन मेरा उपयोग बंद नहीं होगा। मैं आपके साथ तालमेल बनाकर  निरंतर चलता रहूंगा।

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यदि मोबाइल ना होता पर निबंध Hindi essay on if there was no mobile

हेलो दोस्तों कैसे हैं। आप सभी आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि यदि मोबाइल न होता पर निबंध। और जानेंगे कि मोबाइल होने से क्या क्या फायदे एवं क्या नुकसान हैं।

यदि मोबाइल न होता तो आज का युग इतना आधुनिक युग नहीं होता। इस संसार में प्रत्येक वस्तु का कोई लाभ तो कोई हानि होती है। उसी तरह मोबाइल फोन के बहुत सारे लाभ है। तो दूसरी ओर इस मोबाइल फोन के अनेकों नुकसान भी हैं।

आज के इस युग को आधुनिक युग में परिवर्तित करने में मोबाइल फोन कहीं ना कहीं बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है। विकास की राह पर आज अधिकतर सभी वस्तुएं डिजिटल हो गई हैं। यदि यह मोबाइल न होता तो डिजिटल क्रांति लाना असंभव था। क्योंकि मोबाइल फोन ही है। जिसके द्वारा हम ऑनलाइन पैसा लेन देन कर सकते हैं।

हम इसके द्वारा खाना ऑर्डर कर सकते हैं। हम इसके द्वारा ऑनलाइन कपड़े मंगवा सकते हैं। हम यात्रा के तमाम साधनों रेल यात्रा हवाई यात्रा हो या बस यात्रा इन सभी यात्राओं को हम करने से पूर्व हम अपनी सीट रिजर्व कर सकते हैं। जिससे हमें कठिनाई ना हो। इसी तरह मोबाइल फोन के अनेकों लाभ हैं।

यह सभी सुविधाएं हमें आज इस आधुनिक स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं। यदि हम उस जमाने के पुराने कीपैड फोन की बात करें तो वह इस स्मार्टफोन की तरह स्मार्ट नहीं था। परंतु उस समय उस फोन पर बात करना ही बहुत बड़ी बात थी। लोग अपने रिश्तेदारों से बात करने के लिए पीसीओ के सामने लंबी कतार में खड़े रहते थे।

इसके पहले जब फोन नहीं हुआ करता था। तो एक दूसरे तक संदेश पहुंचाना बहुत कठिन था। यदि किसी को संदेश  पहुंचाना होता था। तो उसके लिए पोस्टमैन के द्वारा संदेश भेजा जाता था। और उस संदेश को पहुंचने में कुछ दिन लग जाते थे। तो कभी-कभी किसी संदेश को पहुंचने में महीनों का समय भी लग जाता था।

आज हम इस फोन के द्वारा अपनी बात दूसरों तक कुछ ही सेकंड में पहुंचा सकते हैं। चाहे भले ही वह विश्व के किसी भी कोने में बैठा हो। यह छोटा सा स्मार्टफोन कलयुग का बादशाह बनता जा रहा है। यह छोटा सा फोन संसार की समस्त ज्ञान के भंडार के रूप में कार्य करता है। हमें किसी भी प्रकार की जानकारी चाहिए हो।

इस स्मार्टफोन के जरिए उपलब्ध हो जाती है। कहीं पर जाना हो तो मैप के द्वारा उसी स्थान पर पहुंच सकते हैं।यदि किसी भी व्यक्ति को 1 दिन बिना मोबाइल फोन के रहने को कहें तो उसे 1 दिन भी व्यतीत करने में अनेकों कठिनाइयां होगी। वह उस फोन के बिना रह नहीं सकता है।

मोबाइल फोन के दुष्परिणाम

मोबाइल फोन के जितने फायदे हैं। तो उसके कुछ नुकसान भी हैं। मोबाइल फोन की वजह से लोग अपने रिश्तेदार तथा अपने करीबियों से दूर होते जा रहे हैं। वह पूरे दिन मोबाइल फोन में बिजी रहते हैं। कभी कभी तो लोगों को खाना खाने का भी ध्यान नहीं रहता है।

तो वह अपने दूर रहने वाले रिश्तेदारों से क्या बात करेंगे। इस मोबाइल से लोग अपने रिश्तेदारों तथा अपने रिश्तो से दूर होते जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बच्चों को देखें तो वह अपनी छुट्टियों के दिनों में अपने नाना-नानी तथा रिश्तेदारों के यहां घूमने के लिए जाते थे। लेकिन आज के इस युग में मोबाइल फोन की वजह से बच्चे तथा बड़ों को फुर्सत नहीं मिलती है।

बच्चे अपना पूरा दिन मोबाइल में व्यतीत करते हैं। उन्हें मोबाइल मिल जाए तो फिर उन्हें और किसी की आवश्यकता नहीं होती है। अपने माता-पिता को देखकर छोटे-छोटे बच्चे जो बोलना भी नहीं जानते हैं। उन्हें मोबाइल फोन चाहिए। वह उस पर वीडियो देखते हैं। और अपना समय व्यतीत करते हैं।

वहीं बड़ों को देखें तो वह अपना अधिकतर समय मोबाइल फोन में सोशल नेटवर्क साइट पर बिताते हैं। उनके बहुत सारे नए फ्रेंड बन जाते हैं। लेकिन वह अपने वास्तविक जीवन में कभी मिलते हैं। तो वह एक दूसरे को पहचान नहीं पाते हैं। यदि मोबाइल फोन ना होता तो बच्चे आज भी सोते समय अपनी दादी से कहते दादी आज भी किस्सा सुनाओ।

इस मोबाइल फोन की वजह से वह सभी बातें आज कोसों दूर होती जा रही हैं।आजकल के बच्चों को मोबाइल देखते देखते वही नींद आ जाती है। उन्हें दादी नानी की जरूरत नहीं होती है। एक समय था। जब बाग बगीचे बच्चों की चहल-पहल से गूंजते थे। परंतु अब वह सुनसान पड़े रहते हैं।

लोग भी अपने बच्चों को घरो से बाहर नहीं जाने देते हैं। मोबाइल की वजह से आज कल लोगों के पास को अपनेेे घर वालों के लिए समय नहीं रहता है। साथ ही दादी नानी घर में अकेली बैठी रहती हैं। बच्चों तथा बड़ों के पास उनके लिए समय नहीं रहता है।

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Tuesday, 4 February 2020

कलम की आत्मकथा पर निबंध Autobiography of a pen in Hindi

कलम की आत्मकथा इन हिंदी आज की इस पोस्ट में हम एक पेन की आत्मकथा के बारे में जानेंगे की पेन अपने जीवन में किस प्रकार दूसरों की मदद करती हैं। एवं लोगों को सही राह पर चलने में किस प्रकार मदद करती हैं।

मैं पैन हूं। आज के इस आधुनिक युग में लगभग हर व्यक्ति मुझसे रूबरू है। यहां तक कि आज के इस युग में मैं प्रत्येक व्यक्ति की जेब में रहती हूं।  आधुनिक युग के युवा की में सबसे बड़ी हथियार हूं। युवा चाहे तो मेरा साथ लेकर बहुत कुछ कर सकता है। मैं अधिकतर पढ़े लिखे युवाओं के बहुत काम आती हूं।
Autobiography of a pen in Hindi

वह जहां पर भी जाता है। मुझे साथ लेकर जाता है। मेरा महत्व प्राचीन समय से ही रहा है। प्राचीन समय में मेरे द्वारा महान ग्रंथों को लिखा गया। मैं इस बात से बहुत प्रसन्न हूं। की मेरा उपयोग महान ग्रंथों तथा प्राचीन इतिहास को लिखने के लिए हुआ था। कोई व्यक्ति जो गलत राह की ओर बढ़ रहा है। वह व्यक्ति मुझ जैसे पेन से लिखे गए ज्ञान को पढ़कर  सही राह पर जा सकता है। 

इसी पर नकारात्मक भावना से निकल कर सकारात्मक भावना की ओर आगे बढ़ सकता है। मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तकों की ज्ञान को पढ़कर किसी भी क्षेत्र का नौजवान अनेकों ऊंचाइयों को छू सकता है। एवं अपने आसपास फैल रहे अंधविश्वास को भी दूर कर सकता है। मैं प्रत्येक पुस्तक में संलग्न हूं। जिसे पढ़कर युवा अपने जीवन मैं सफलता की राह की ओर आगे बढ़ता है।

मैं प्रसन्न हूं। क्योंकि मेरे द्वारा लिखे ज्ञान से युवा अपने जीवन की राह सही दिशा में बदल सकता है। वह मेरे द्वारा लिखे ज्ञान की ताकत से बुराई का विनाश कर रहा है। और अच्छाई को नई राह दिखा रहा है। जिससे लोगों के बीच नकारात्मकता  सोच का बहिष्कार किया जाता है।

यह मुझे बहुत खुशी की बात है। कि लोगों मैं सच्चाई के प्रति अटूट विश्वास है। और उन्हें पता है। कि जीत हमेशा सच्चाई की होती हैं। लोग जानते हैं। कि कोई कितना भी झूठ क्यों ना बोले लेकिन सौ बका का और एक लिखा ( जिसका अर्थ है कि 100 लोग किसी बात को  बोले लेकिन एक लिखी हुई बात को सत्य माना जाता है) माना जाता है।

मेरे द्वारा लिखे हुए ज्ञान से लोगों में जागरूकता फैलाई जा सकती है। जिससे वह समाज में फैली हुई बुराइयों का विनाश कर सकते हैं। जिससे हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। जो कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत ही आवश्यक है। मेरे द्वारा महान हस्तियों  के बारे में लिखा गया है। जिसको पढ़कर यह समाज एक नई राह की ओर आगे बढ़ सकता है। 

जिन्होंने वाकई समाज के लिए बहुत कुछ किया है। एवं देश की उन्नति के लिए नई राह प्रदान की है। जिससे देश का भी उद्धार हो सके। हमारे देश की महान हस्तियों ने सच्चाई के रास्ते पर आगे बढ़कर हमारे देश को स्वतंत्रता दिलाई। जिसमें मेरे द्वारा लिखे हुए ज्ञान की एक महत्वपूर्ण भूमिका थी। जिसने अहिंसा मार्ग को अपनाने की शिक्षा दी।

मेरे द्वारा लिखे हुए ज्ञान को पढ़कर महान हस्तियों को धैर्य एवं शिक्षा प्राप्त हुई। जिससे वह अपनी सफलताओं में कामयाब हुए। आज भी मेरे द्वारा इन महान हस्तियों के बारे में निरंतर लिखा जा रहा है। जिसे पढ़कर आधुनिक युग का युवा अपने जीवन मैं प्रेरणा लेकर  अपने जीवन को सफलता की राह पर निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है।

देश की महान हस्तियों को ऊंचा दर्जा दिया जाता है। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की प्रेरणा के द्वारा लोगों को सही मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। जो एक अच्छे समाज के लिए बहुत उपयोगी है। जिससे एक अच्छे नागरिक की उत्पत्ति होती है। जिससे वह अच्छा नागरिक बनकर इस देश और दुनिया के लिए कुछ अच्छा कर सकें। 

इन सब बातों पर अमल करने के लिए उसे एक बेहतर शिक्षा और मेरी बहुत आवश्यकता पड़ेगी। उस व्यक्ति के जीवन में मेरा बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहेगा। किसी ने खूब कहा है। कलम किसी तलवार से कम नहीं होती। क्योंकि तलवार से लगी चोट ठीक हो सकती है। परंतु कलम से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती। उसी तरह मैं ऐसे काम कर सकती हूं। 
जो किसी तलवार के द्वारा संभव नहीं है। मैं पेन एक पत्रकार की तलवार होती हूं। जिसे चलाकर एक पत्रकार अच्छे अच्छे लोगों के छक्के छुड़ा देता है। पत्रकार मेरा उपयोग कर लोगों को जागरूक कर एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकता है। मेरा उपयोग तलवार के रूप में किया जा सकता है। उसी तरह मेरा उपयोग सही काम या गलत काम के लिए भी किया जा सकता है।

किसी भी गलत काम को करने में मेरी कोई भूमिका नहीं होती है। क्योंकि मैं तो एक मार्ग हूं। जिसे लेखक अपने अनुसार उपयोग करता है। लेकिन गलत तो गलत होता है। एवं गलत तरीके से किया गया कार्य ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता । और कुछ समय बाद गलत तरीके से किया गया कार्य सबके सामने आ जाता है।

मैं प्रत्येक क्षण सच्चाई का साथ देती हूं। जिससे लोगों में सच्चाई के प्रति विश्वास बना रहे। मुझे बहुत खुशी है। कि मेरे द्वारा लिखे ज्ञान का अध्ययन कर लोग अपने जीवन को सफल बनाते हैं। मुझे अपने आप पर बिल्कुल अहंकार नहीं है। कि मैं क्या हूं। या क्या कर सकती हूं। मैं तो सिर्फ एक मार्ग हूं। 

मेरा उपयोग कर व्यक्ति अपने जीवन मैं अनेकों सफलताओं तक पहुंच सकता है। साथ ही महान व्यक्ति बन सकता है। आज के आधुनिक युग में अधिकतर लोग मेरा उपयोग करते हैं। और अपनी सफलता की राह पर आगे बढ़ते हैं। ना जाने कितने लोगों ने मेरे द्वारा अपने जीवन को सफल बनाया है। 

अनेकों लोग मेरी तारीफ करते हैं। लोग मेरे द्वारा लिखे ज्ञान को पढ़ते हैं। और उस ज्ञान से  दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बनते है। क्योंकि किसी ने खूब कहा है। की ज्ञान एक ऐसा धन है। जिसे कभी भी कोई चोर चोरी नहीं कर सकता और दूसरों में बांटने से यह धन बढ़ता है । इस मोह माया वाले संसार में मैं अकेली कुछ नहीं कर सकती। लेकिन एक बड़ा बदलाव लाने के लिए मैं बहुत आवश्यक हूं। जिससे मेरा उपयोग कर कोई भी व्यक्ति चाहे तो बहुत कुछ कर सकता हूं।

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बादल की आत्मकथा हिंदी निबंध Badal ki atmakatha essay in hindi

मैं बादल आसमान में तैरता फिरता हूं। कभी यहां तो कभी वहां घूमता फिरता रहता हूं। मेरा रूप  निराला है। कहीं छोटे आकार में तो कहीं विशाल आकार में रहता हूं। मेरा कोई निश्चित आकार नहीं है। समय तथा वायु की गति के साथ मेरा आकार छोटा तथा बड़ा होता रहता है।

मेरा जन्म पानी तथा बर्फ के छोटे-छोटे कणों से मिलकर होता है। मैं जीवन भर एक स्थान से दूसरे स्थान पर सैर करता फिरता हूं। मेरे साथ कई प्रकार के पक्षी उड़ते हुए जाते हैं। हवाई जहाज की सैर करने वाले यात्री मुझे बहुत करीब से देख पाते हैं। एवं मेरी शीतलता को महसूस कर उस का आनंद लेते हैं। हवाई जहाज में बैठे लोग मुझे देख प्रसन्न हो जाते हैं।
Badal ki atmakatha essay in hindi
मेरे नजदीक से बहुत सारे हेलीकॉप्टर तथा हवाई जहाज प्रतिदिन गुजरते हैं। जिनमें बहुत सारे यात्री यात्रा करते हैं। तथा मुझे देखकर प्रसन्न होते हैं। और हवाई जहाज मैं यात्रा करते समय मेरी फोटो खींचते हैं। बरसात के मौसम में मेरा रूप और भी सुंदर हो जाता है। कहीं सफेद रंग तो कहीं नीला रंग में धारण करता हूं।

बरसात के मौसम में जब मैं जल बरसाता हूं। तो लोग मेरी छोटी छोटी बूंदों को देख प्रसन्न हो जाते हैं। और अपने घरों से निकलकर उन बूंदों में आकर बरसात का आनंद लेते हैं। जब मैं बसंत के आगमन पर जल बरसाता हूं। तो मनुष्य ही नहीं अपितु पशु-पक्षी मुझे देख कर झूमने लगते हैं। एवं प्रवासी पक्षी अपने घर वापस आ जाते हैं।

मुझे देख मनुष्य बहुत प्रसन्न हो जाता है।क्योंकि मैं खेती के लिए उपयोगी हूं। मै प्रत्येक जीव के लिए उपयोगी हूं। मुझे जल बरसाता देख सबसे अधिक खुशी मोर पक्षी को होती है। जब मैं बरसात कराता हूं। तो मोर मुझे देख बहुत प्रसन्न होती है। और अपनी प्रशंसा को दिखाने के लिए वह तरह तरह के नृत्य करने लगती है।

साथ ही अन्य पक्षी भी अपनी खुशी मैं फूले नहीं समाते  है। इन पक्षियों तथा मनुष्य को इतना खुश देख कर मैं बहुत खुश होता हूं। मोर के नृत्य को देखकर मेरा मन प्रसन्न हो जाता है। इसे देख मुझे ऐसा लगता है। कि मैं जल बरसाता जाऊं। लेकिन मैं कभी-कभी आवश्यकता से अधिक जल बरसाता हूं।

तब वहां के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उनकी फसले  नष्ट हो जाती है। इस कारण वह मुझसे नाराज हो जाते हैं। उनका नाराज होना भी सही है। क्योंकि उन्हें खाने तथा पीने के लिए पानी की चिंता सताती है। आवश्यकता से अधिक जल बरसाने के कारण पशु पक्षियों का जीना भी  मुश्किल हो जाता है। पक्षियों को भी खाना ढूंढने में दिक्कत होती है।

लेकिन मेरा जल बरसाना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि मैं बरसात नहीं कराऊंगा तो इनकी मुश्किलें और भी बढ़  सकती हैं। मुझे बरसात कराता देख नदी, नाले, तालाब तथा झीले बहुत प्रसन्न होती हैं। एवं इन पर आश्रित रहने वाले लोग मेरा धन्यवाद करते हैं। इस बात से मैं बहुत प्रसन्न होता हूं।

गर्मियों के दिनों में मुझे नितदिन एक ही काम रहता है। एक स्थान से दूसरे स्थान  की सैर करना। गर्मियों के दिनों में घूमते-घूमते मुझे  बहुत बच्चे खेलते हुए दिखते हैं। जिन्हें देखकर मैं बहुत प्रसन्न होता हूं। जब बच्चे तरह-तरह के कलर की पतंग उड़ाते हैं।

 तो उन्हें देख मैं बहुत प्रसन्न होता हूं। तथा गर्मियों के दिनों में मेरा कलर  सूर्य अस्त के समय सूरज की रोशनी के कारण लाल भी दिखाई देता है। जो लोगों को बहुत भाता है। बरसात के दिनों में लोग मेरे नीले कलर को देखकर अनुमान लगा लेते हैं। कि अब बरसात होगी। लेकिन यह अनुमान कभी-कभी गलत भी हो जाता है।

 परंतु मौसम विभाग वाले मेरी गति तथा आकार को देखकर वह पूर्व अनुमान लगा लेते हैं।  बरसात कब और कहां पर होगी। लेकिन कभी-कभी तेज  गति के कारण मेरी दिशा परिवर्तित  हो जाती हैं। जिसके कारण में एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित हो जाता हूं। बरसात के मौसम मैं तेज ध्वनि उत्पन्न करता हूं। जिससे बहुत सारे लोग डर जाते हैं।

खासकर बच्चे मेरी ध्वनि से भयभीत हो जाते हैं। मेरे तेज गरजने से लोग मुझसे नाराज हो जाते हैं। लेकिन मैं बादल हूं। और मेरा तो काम ही है। मैं अपने जीवन में बहुत खुश हूं। क्योंकि मैं हर प्रकार के जीव को जीवनदायिनी जल प्रदान करता हूं। जो हर एक मनुष्य तथा जीव जंतु के लिए  बहुत महत्वपूर्ण है। किसी ने खूब कहा है। जल है तो कल है, जल ही जीवन है।

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भिखारी पर निबंध Essay on Beggar in Hindi

Essay on Beggar in Hindi आज की पोस्ट में हम भिखारी के बारे में जानेंगे। कि भिखारी अपने जीवन को किस प्रकार व्यतीत करता है। एवं उसे किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भिखारी बड़ी कठिनाइयों से अपने संपूर्ण जीवन को गुजारता है।

जो व्यक्ति अपने जीवन का गुजारा दूसरों से मांगी हुई वस्तुएं अथवा रुपए से करता है। जो नितदिन दूसरों पर आश्रित रहता है। वह उनसे भीख मांगता है। उसे भिखारी कहते हैं। जो व्यक्ति किसी भी प्रकार का श्रम नहीं कर सकता। उसे अपनी आजीविका चलाने के लिए मात्र एक सहारा (भीख मांगना खाना) रह जाता है। 
Essay on Beggar in Hindi
ऐसे व्यक्ति घर-घर जाकर लोगों से भीख मांगते हैं। और जो मिलता है। वह उसमें संतुष्ट रहते हैं। कई लोग भीख  मांगकर अपने जीवन का गुजारा करते हैं। लेकिन भीख मांगना कोई सही बात नहीं है। क्योंकि समाज के लोगों भिखारियों को अपमान की दृष्टि से देखते हैं। लेकिन कई लोगों को वास्तव में भीख मांगनी पड़ती है। क्योंकि वह मानसिक तथा शारीरिक रूप से विकलांग होते हैं।
उनके जीवन का एकमात्र सहारा भीख मांगना रह जाता है। इस वजह से वह भीख  मांग कर अपना पेट पालते हैं। फिर भी कई लोग इन्हें चिल्लाकर भगा देते हैं। या ₹1, ₹2 दे देते हैं। लाचार भिकारी वाकई दया का पात्र होता है। क्योंकि वह किसी न किसी रूप से लाचार या बुजुर्ग होते हैं। इस वजह से उन्हें भीख मांगना पड़ता है।
लेकिन इसके बदले में उन्हें दूसरों के सामने बार-बार भीक देने के लिए कहना पड़ता है। इसके बदले में भिखारियों को उन लोगों के लिए ईश्वर से प्रार्थना तथा दुआएं करते हैं। यह भिखारी सड़क के किसी किनारे पर बेठे मिलते हैं।तथा यह भिखारी मंदिरों के सामने बड़ी तादाद में देखने को मिलते हैं। क्योंकि मंदिरों में धर्म करने वाले बड़ी संख्या में आते हैं।

इन भिखारीयों को भीख देकर पुण्य कमाते हैं। इस वजह से मंदिरों पर भिखारियों की तादाद बड़ी संख्या में देखी जाती है। हमारे देश में भिखारी बड़ी संख्या में निवास करते हैं। इन भिखारियों मैं कुछ भिखारी तो ऐसे भी होते हैं। जो मानसिक तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। फिर भी श्रम कर पैसा नहीं कमाना चाहते हैं। क्योंकि यही उनकी जॉब होती है।

उन्हें इसी तरह बिना श्रम किए खाने की आदत पड़ चुकी है। भिखारी यह सोचते हैं। कि आस्था के नाम पर किसी भी व्यक्ति को आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है। इस वजह से हमारे देश में भिखारियों की तादाद में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। कुछ भिखारी माथे पर तिलक लगाकर हाथों में भिक्षा का पात्र लेकर घर-घर मांगते हैं। 

जिससे लोग उन्हें आसानी से भीख दे देते हैं। इस तरह के भिखारी भिख भी ऐसे मांगते हैं। जैसे कि वह भीख देने वाले व्यक्ति पर कृपा कर रहे हो। अगर वह व्यक्ति इस भिखारी को भीख नहीं देगा तो वह पाप का भागी बनेगा। हमने कुछ ऐसे भिखारी भी कभी ना कभी देखे होंगे जो दिन भर भिखारी का वेश धारण कर भीख मांगते हैं। और रात होते ही वह नशीले पदार्थों का सेवन करके सड़क किनारे मटकते हुए दिखेंगे।

भीख देना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन भी उसी व्यक्ति को देना चाहिए। जो उसका पात्र है। लेकिन हमें भी देने से पहले उस भिकारी की हालत देख लेना चाहिए। कि वह उसका पात्र है या नहीं यदि भिखारी किसी तरह से लाचार या भीख का पात्र है। तो हमें उस व्यक्ति को भीख देना चाहिए। यदि हम किसी हट्टे कट्टे व्यक्ति को भीख देते हैं।

इससे उसकी आदतें खराब होती हैं। और वह हमेशा भीख मांगता रहेगा । अधिकतर भिखारी अपने संपूर्ण जीवन भर भीख मांग कर आराम से जीवन व्यतीत करते हैं। और मिले पैसों से अपनी  सोके पूरी करते हैं। वह तरह-तरह की नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। तथा लोगों के सामने लाचार तथा दीन दुखी बनने का नाटक करते हैं। फटे पुराने कपड़े पहन लेते हैं। नहाते भी नहीं है।

जिससे उनके शरीर से बदबू आती रहे और लोग उन्हें लाचार समझकर पैसे दे दे। इसी तरह एक एक रुपए मांग कर बहुत धन एकत्रित कर लेते हैं। समाज के भोले वाले लोगों की दया भावना का फायदा उठाते हैं। ऐसे व्यक्ति को कभी भी भीख नहीं देना चाहिए। क्योंकि स्वस्थ भिखारी को भीख देकर हम इसको और बढ़ावा देते हैं।
हमें उस भिखारी को भीख देना चाहिए जो किसी रूप से विकलांग हो। हमें भिखारी को भीख में हो सके तो खाने के लिए खाना तथा पहनने के लिए कपड़े देना चाहिए।यदि वह व्यक्ति काम करने में सक्षम हैं। तो हमें उस व्यक्ति की किसी तरह काम करने में मदद करना चाहिए। जिससे कि वह काम करके पैसा कमा सकें। हमे हमारे आसपास ऐसे  भिखारी ज्यादा देखने को मिलते हैं। 

जो हर तरह से स्वस्थ हैं। और श्रम कर पैसा कमा सकते हैं।परंतु उन्हें श्रम कर पैसा नहीं कमाना है। क्योंकि उन्हें जब बिना श्रम किए पैसे मिल जाते हैं। तो वह श्रम क्यों करेंगे। ऐसे लोगों को कभी भी भीख नहीं देना चाहिए। आज के इस दौर में भीख मांगना एक फैशन बन चुका है। हमने तीर्थ स्थलों पर देखा है। की भीख मांगने वाले भिखारियों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

हम जितने बड़े शहरों में देखें हमें वहां और भी प्रोफेशनल भिखारी देखने को मिलेंगे। जो एक बार आपको देख ले। फिर वह आपका पीछा नहीं छोड़ेंगे। और भीख लेकर ही मानते हैं । यदि हम ऐसे भिखारियों को एक दो रुपए भीख में देते हैं। तो यह भिखारी हमें वापस लौटा देते हैं।

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Ek Budhiya ki atmakatha in hindi

दोस्तों आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको 85 साल  की एक बूढ़ी औरत की आत्मकथा से रूबरू कराने जा रहे हैं। इस पोस्ट को पूरी पढ़ें।
Ek Budhiya ki atmakatha in hindi 
मैं बूढ़ी औरत हूं। मेरी उम्र 85 वर्ष है। अब मुझसे कुछ काम भी नहीं बनता है। और मैं बड़ी कठिनाइयों के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रही हूं। क्योंकि मेरे पास अब मेरा कोई परिवार नहीं है। और ना ही मेरा जीवन साथी मेरे साथ है। मेरे दो बच्चे है। जिन्हें पाल पोस कर मैंने बड़ा किया उनकी शादी की। अब वह मुझे अपने साथ नहीं रखते हैं। क्योंकि मैं बूढ़ी हो गई हूं। इसलिए उन्होंने मुझे एक वृद्धा आश्रम में छोड़ दिया है। और वह मुझे कभी भी मिलने नहीं आते हैं। जब मेरे दोनों बच्चे बहुत छोटे थे। तब मेरे पति का देहांत हो गया था। और जब से मैंने इन दोनों बच्चों को बहुत मुसीबत सहकर कर इनका पालन पोषण किया है। लेकिन अब इन्हें मेरी कोई भी परवाह नहीं है।

मुझे मेरे दोनों बच्चे एक समान प्यारे हैं। मैंने इन बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाई। जिससे यह अपने भविष्य को सुधार सकें। जिस गरीबी में मुझे जीना पड़ा उस गरीबी में इन बच्चों को ना जीना पड़े। उन्होंने अच्छी शिक्षा प्राप्त की और आप दोनों अच्छा कमाते भी हैं। मुझसे जब तक काम बनता था। उन्होंने तब तक मुझे अपने साथ रखा और अब मुझसे कुछ काम नहीं बनता है। तो उन्होंने मुझे वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया। में यहां रहकर किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही हूं। लेकिन मुझे इस वृद्ध आश्रम से कोई शिकायत नहीं है।

मुझे यहां पर घर जैसी हर सुविधाएं  मिलती हैं। जब मैं सुबह उठती हूं। तो मुझे चाय दी जाती है। एवं जितना मुझसे बनता है। उतना काम मैं स्वयं करती हूं। मेरे साथ मेरे जैसी प्रताड़ित अन्य महिलाएं भी हैं। जिनके साथ में खुश रहती हूं। हम सभी आपस में मिलजुल कर काम को करते हैं। मैं कुछ महिलाओं के साथ घूमने के लिए जाती हूं। मैं अधिकतर मेरा समय मेरे साथियों के साथ गुजारती हूं। जिससे कि मुझे मेरे बच्चों तथा घरवालों की याद ना आए। क्योंकि मैं उनके बारे में सोच कर कुछ कर भी नहीं सकती यदि मैं उनके पास जाना भी चाहती हूं। तो वह मुझे स्वीकार नहीं  करेंगे।क्योंकि मैं एक बुजुर्ग महिला हू। इस वजह से वह मुझे स्वीकार नही करेंगे।

लेकिन वह यह नहीं जानते।  वह भी एक दिन  बूढ़े हो जाएंगे और उनके बच्चे उन्हें घर से बाहर निकाल देगे। तब उन्हें इस बात का एहसास होगा। किसी बुजुर्ग को घर से बाहर निकालने पर उसे कितनी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। अभी उन्हें इस बात का कोई भी अफसोस नहीं होता है। कि हमारी मां किस हाल में और कैसी हैं। जब तक मैंने में बच्चों का साथ दिया और मुझसे जितना बनता था। मैं उतना काम करती थी। लेकिन अब मुझसे काम बिल्कुल नहीं बनता है। तो उन्होंने मुझे घर से बाहर निकाल दिया। लेकिन मैं फिर भी उन्हें दुआ देती हूं।

वह हमेशा खुश रहे क्योंकि उन्होंने जो किया वह उनका कर्म था। लेकिन मैं तो अपने कर्म से पीछे  नहीं हटऊंगी। मैं उन्हें हमेशा दुआ देती हूं। वह और उनके बच्चे खुश रहें। क्योंकि एक ना एक दिन सभी को  बूढ़ा होना है। मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं है। कि मैं एक वृद्धा आश्रम में रहती हूं। क्योंकि मुझे इस बृद्धा आश्रम से घर से ज्यादा सुख सुविधाएं मिलती हैं।।और ना मुझे यहां पर किसी के ताने अथवा गालियां सुननी पड़ती हैं। जिस वक्त जो करना है। वह काम करो यहां पर कोई रोकने या टोकने वाला नहीं होता है। मैं यहां रह कर अपने साथियों के साथ बहुत प्रसन्न हूं।

मैं उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहती हूं। जिस व्यक्ति ने इन जैसे अनाथ आश्रम की शुरुआत की। यह आश्रम नहीं होता तो मेरा क्या होता। अनाथ आश्रम वाले बहुत अच्छे हैं। हमारा बहुत अच्छे से ख्याल रखते हैं। हम सभी बुजुर्ग महिलाएं इस आश्रम में रहकर बहुत खुश  है। क्योंकि हमें इस आश्रम में हमारी आवश्यकता के अनुसार हर चीज मुहैया कराई जाती हैं। जिसकी हमें आवश्यकता होती है। हम सभी महिलाएं इस वृद्ध आश्रम में बहुत खुश हैं। और सुबह शाम भगवान के भजन करते हैं। जिससे हमारे मन को बहुत शांति का अनुभव होता है। जब कमी भी मुझे मेरे घर वालों की याद आती है।

मैं उस वक्त अपने ईश्वर की भक्ति करने लगती हूं। जिससे मेरा मन सहल जाता है। जब सबसे पहले मुझे मेरे बच्चों ने इस वृद्ध आश्रम में छोड़ा था। तो उस वक्त मुझे बहुत बुरा लगा था। परंतु अब मेरे जेसी और अन्य महिलाओं से मेरी मुलाकात हो गई है। जिससे अब मुझे बुरा नहीं लगता है। और अब मैं इनके साथ खुशी-खुशी रहती हूं। अब मेरी मुलाकात इन सभी महिलाओं से हो चुकी हैं। और अब हम एक साथ खुशी-खुशी रहते हैं। हम सभी एक दूसरे की मदद करते हैं। हम सभी महिलाएं यहां एक परिवार के रूप में रहते हैं। इस कारण भी हमें हमारे घर की याद नहीं आती है। अब मैं इस आश्रम में रहकर बहुत खुश हूं। और मुझे मेरे परिवार की याद नहीं आती है। मैं हमेशा यही दुआ करती हूं कि वह खुश रहें।

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ग्लोबल वार्मिंग पर जानकारी details on Global warming in Hindi

ग्रीन हाउस गैसों के कारण हो रहे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। जीवाश्म ईंधन जैसे गैस कोयले के जलने के कारण कार्बन  डाइऑक्साइड निकलती है। जो ग्रीन हाउस प्रभाव का मुख्य कारण है। यही कारण है। कि पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि होती जा रही है।

global warming kya hai – ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने से हमारी पृथ्वी की हरी भरी सुंदरता में कमी आती जा रही हैं। और पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। सुंदरता की कमी और भी कारण है। जैसा कि आपने देखा होगा कि कटाई की जा रही है। एवं शहरों का निर्माण किया जा रहा है।  शहरों के निर्माण के लिए हजारों पेड़ों को काट दियाा जाता

इसके अलावा सड़कों पर दौड़ता हुआ यातायात एवं बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाली जहरीली गैसे हमारे वायुमंडल को दूषित  कर रही हैं। समय के साथ बदलाव संसार का नियम परंतु आप जब 30 से 40 साल पहले के इस पृथ्वी के मौसम एवं तापमान पर नजर डालेंगे तो आपको आज के तापमान में काफी ज्यादा अंतर देखने को मिलेगा।

आज कल के मौसम हमने देखे हैं। की बरसात के मौसम में ना तो समय पर बरसात होती है। और ना ही ठंड एवं गर्मी के मौसम नियमित रहते हैं। मौसम में कभी बहुत अधिक ठंडे पड़ गई हैं। कभी बहुत कम ठंडी पड़ती हैं। पृथ्वी के मौसम परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण कारण पेड़ों की संख्या में लगातार हो रही कटौती है।

आज इसके बारे में जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है। तो चलिए पढ़ते हैं। पृथ्वी के तापमान में हो रही लगातार बढ़ोतरी या पृथ्वी के इस गर्म होने की प्रक्रिया को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग को जलवायु परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। जलवायु परिवर्तन का मतलब पृथ्वी के तापमान में होने वाले बदलाव है।

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव Side effects of global warming – ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के पर्यावरण के तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही है। और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमें नई नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की मुख्य समस्या का कारण वायुमंडल में एकत्रित हुई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा है। जो कि हमारी पृथ्वी से गर्मी को बाहर नहीं जाने देती है। जब हम कोयला तेल टइत्यादि को जलाते हैं।

इनके परिणाम स्वरूप कारण उत्पन्न होती है। जो कि एक चादर की परत के जैसा कार्य करती है। जो कि पृथ्वी की सतह को ढक लेती है।ट और गर्मी अंदर कैद हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न होती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बारिश के मौसम चक्र में बदलाव आता जा रहा है। गर्मियों के मौसम नियमित नहीं रहे हैं। जिसके कारण कुछ हिस्सों में बहुत अधिक सूखे का सामना करना पड़ रहा है। 

जिसके कारण देश-विदेश की कई जगह ऐसी हैं। जहां पर खेती करना असंभव हो गया है। पृथ्वी का तापमान बढ़ने के परिणाम स्वरूप ग्लेशियरों के पिघलने की संख्या में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके कारण बहुत से देशों को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। ग्रीन हाउस गैसों के कारण हमारे पर्यावरण में अनेक प्रकार की विषैली गैस उत्पन्न हो गई हैं। जिसके कारण कई प्रकार की पशु पक्षियों की प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर है। 

ग्रीन हाउस गैसों के कारण विभिन्न प्रकार की एलर्जी त्वचा रोगों की समस्या उत्पन्न हो गई है। हमारे पर्यावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से सांस लेने मैं परेशानी की समस्या के साथ और भी कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्र का जल स्तर बढ़ने के कारण समुद्र में रहने वाले जलीय जीवो के जीवन पर  बुरा असर पड़ रहा है।
सूरज की रोशनी के साथ आने वाली पराबैगनी किरने वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत की सतह कुछ पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर लेती हैं। और शेष बची किरणे वायुमंडल से गुजरती हैं। पृथ्वी के सतह वातावरण में रेडिएशन दर्शाती हैं। वायु मंडल में उपस्थित ग्रीन हाउस गैसें पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर लेते हैं। 

जिसके परिणाम स्वरूप वातावरण गर्म हो जाता है। वह गैसे जो थर्मल इंफ्रारेड रेडिएशन अवशोषत करने की क्षमता रखती हैं। वह ग्रीन हाउस गैसें कहलाती हैं। जैसे CO2 H2O N2O CH4 O3 यह गैसे एक ग्रुप के रूप में रहती हैं। और इंफ्रारेड रेडिएशन अवशोषित करती हैं। परंतु इन गैसो की मात्रा में बहुत अधिक वृद्धि के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हुई है। क्योंकि कुछ  दशक से औद्योगिक क्षेत्र में काफी अधिक संख्या में वृद्धि हुई है। 

जिसके परिणाम स्वरूप कोयला तेल आदि ईधन के उपयोग से ग्रीन हाउस गैस से विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कार्बनमोनोऑक्साइड ऑक्सीजन नाइट्रोजन अमोनिया मीथेन एक निश्चित मात्रा में थी। लेकिन मानव समुदाय की गतिविधियों के कारण इन गैसों में असंतुलन हुआ है।

जिसके फलस्वरूप वायु में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी हुई है। एवं अन्य गैसों की मात्रा में वृद्धि हुई है। ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि के कारण ओजोन परत जो कि सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों को रोकती है। में गिरावट आई है।

ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम– Prevention of global warming ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम के लिए हमें आवश्यकता है। कि हर देश के नागरिक इसके प्रति जागरूक हो की ग्लोबल वार्मिंग क्या है। और कैसे होता है।अगर नागरिक इसके प्रति जागरूक होंगे तो इससे ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम में बहुत अधिक मदद मिलेगी। इस पृथ्वी के संरक्षण के लिए हमें वातावरण को जितना संभव हो कम  प्रदूषण करना चाहिए। 

पर्यावरण के असंतुलन के लिए मानव समुदाय जिम्मेदार है। इससे बचने के लिए हमें कार्बन फुटप्रिंट को कम करना चाहिए। हमें सीएफसी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) गैसों के उत्सर्जन को कम करना चाहिए। जोकि एसी फ्रिज इत्यादि मशीनों के उपयोग को कम करके रोका जा सकता है। वाहनों से निकलने वाला धुआ बहुत हानिकारक होता हैं।
क्योंकि उसके द्वारा निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड से हमारे पर्यावरण में गर्मी बढ़ रही है। हमारे पर्यावरण के लिए प्लास्टिक एक अभिशाप है।  ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए हमें आवश्यकता है। कि हम प्लास्टिक का जितना हो सके उतना कम उपयोग करें। उपयोग नहीं करें तो अच्छा।
प्लास्टिक या पॉलीथिन ऐसी वस्तु हैं। जिन को जलाने के बाद भी यह पूर्णता नष्ट नहीं होती है। और पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए इसका उपयोग करने से हमें बचना चाहिए।
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भिखारी पर निबंध Bhikhari ki jeevan kahani in Hindi

मैं अपने काम से दूसरे शहर गया हुआ था। मैं रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे स्टेशन के समीप खड़ा ही हुआ। की तभी मुझे पीछे से आवाज आती है। की साहब 2 दिन से कुछ नहीं खाया कुछ खाने को दे दो भगवान आपका भला करेगा। जब मैंने उसकी भिखारी की और देखा तो वास्तव में उसकी हालत दयनीय थी।
Bhikhari ki Atmakatha in Hindi
फटे पुराने कपड़े पहने हुए शरीर में बदबू आ रही थी। लंबे-लंबे गंदे बाल पतला दुबला शरीर एक पेर से लाचार था। स्टेशन पर आते जाते सभी लोगों से भीख मांग रहा था। मुझे उसकी हालत देखकर बहुत तरस आ गया। सबसे पहले मैंने उस भिखारी को खाना खिलाया। तथा इस  भिकारी को कपड़े दिलवाए। वह  बहुत खुश हुआ। मैंने उस भिखारी से पूछा कि आप जन्म से भिखारी हो।

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मेरी यह बात सुनकर भिखारी रोने लगा और रोते रोते कहा साहब में जन्म से भिखारी नहीं था। तो मैंने पूछा तो फिर यह सब कैसे हुआ तब इस व्यक्ति ने मुझे अपनी आपबीती सुनाई इस कमबख्त पैर ने मुझे भिखारी बना दिया। कुछ साल पहले में  एक सामान्य इंसान की तरह अपना जीवन व्यतीत करता था। अपनी पत्नी तथा बच्चों का पेट पाल रहा था।

मैं एक छोटे से गांव में रहता था। कुछ समय तक मैंने अपने गांव में काम किया। वहां पर कभी-कभी काम नहीं मिलता था। इसलिए मैं अपने पत्नी तथा बच्चों को लेकर शहर आ गया। क्योंकि गांव में मेरी कमाई का एक मात्र साधन मजदूरी थी। वह भी रोज नहीं मिलती थी। और मात्र एक घर था। इस गांव में मेरा और कोई भी नहीं था। इसलिए मैं शहर आ गया और आकर मैंने एक कमरा किराए पर ले लिया।

यहां पर अच्छे से काम की तलाश में मैं कई दिनों तक घूमता रहा लेकिन मुझे कोई काम नहीं मिला। तब मैंने सोचा कि कुछ ना कुछ काम तो करना पड़ेगा। तब में अन्य मजदूरों के साथ चौराहे पर खड़ा हो जाता था। वहां पर और भी बहुत सारे मजदूर सुबह-सुबह खड़े रहते थे। और मुझे किसी किसी दिन काम मिल जाता था। जिससे मैं अपना तथा अपने परिवार का पेट पाल रहा था। साथ ही में अच्छे काम की तलाश भी कर रहा था। और कुछ ही समय बाद मुझे एक काम मिल गया।

मैं वहां काम करने लगा और मैं बहुत खुश था। लेकिन एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। मैं अपने पूरे परिवार के साथ घूमने के लिए गया था। लेकिन हम जिस बस में जा रहे थे। वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें मैंने मेरे परिवार को खो दिया। इस दुर्घटना में मेरा एक पैर चला गया। मेरी पत्नी तथा बच्चों के अलावा मेरा इस दुनिया में और कोई भी नहीं था।

मैं कुछ महीनों तक अस्पताल में ही रहा और जब मैं घर पहुंचा तो मेरे पास किराया देने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने वह घर खाली कर दिया। अब मेरे पास खाने तथा रहने के लिए कोई भी जगह नहीं थी। तीन दिन गुजर गए थे। मैं भूखा रहा लेकिन किसी भी व्यक्ति ने मेरी कोई मदद नहीं की। मैं अपने जीवन से बहुत परेशान हो गया था। और आखिरकर मैं सोच रहा था।

कि अब मेरा इस दुनिया में जीने का कोई मकसद नहीं रहा। लेकिन मैंने एक पल बाद सोचा कि इस तरह मरना किसी गुनाह से कम नहीं है। मेरे इस पैर की वजह से कोई मुझे काम देने के लिए भी तैयार नहीं था। फिर मैंने सोचा कि अपने जीवन का गुजारा करने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।

इसलिए मैंने आखिरी रास्ता भीख मांगना अपनाया और अब मैं यहीं बैठकर भीख मांगता हूं। कई लोग भीख दे देते हैं। तो कई लोग चिल्लाकर चले जाते हैं। लेकिन साहब आप पहले इंसान हो जिन्होंने मुझ जैसे भिखारी का हाल पूछा। मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद। भिखारी  की आपबीती सुनकर मैं दंग रह गया। और यह सभी बातें बोलकर वह फिर से रोने लगा।

भिखारी अपने बीते हुए अतीत को वापस याद कर बहुत दुखी हुआ। उस भिखारी की आपबीती सुनकर मेरी आंखें नम हो गई।  मैंने सोचा कि इस बेचारे इंसान की जिंदगी एक घटना ने पूरी बदल कर रख दी। मुझसे जितनी बनी मैंने उस भिखारी की मदद की। मैं बहुत प्रसन्न था। कि ईश्वर ने मुझे इस लायक बनाया की मैं दूसरों की मदद कर सकूं । जीवन की एक घटना ने इस इंसान को वाकई कहां से कहां लाकर खड़ा कर दिया।

हमें ऐसे लाचार लोगों की मदद करना चाहिए। जो लाचार और असहाय है। उन लोगों की मदद के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।यदि हमें ऐसा कोई भी भिखारी देखने को मिलता है। तो हमें उसे कभी भी बिना वजह जाने डांटकर नहीं भगाना चाहिए। क्योंकि उस बेचारे व्यक्ति पर क्या गुजरेगी इस बात का हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते।

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क़ुतुब मीनार पर निबंध essay on qutub minar in hindi

कुतुबमीनार भारत की एक ऐतिहासिक मीनार है। इसकी गिनती भारत की सबसे बड़ी दूसरे मीनार में की जाती है। क़ुतुब मीनार को देखने के लिए पर्यटक साल भर देश विदेश से आते रहते हैं। क़ुतुब मीनार देखने में बहुत सुंदर दिखाई देती है। कुतुबमीनार भारत की राजधानी दिल्ली के दक्षिण भाग में स्थित है। यह एक ऐतिहासिक मीनार है।
इस मीनार को बनाने के लिए संगमरमर तथा बलुआ  पत्थर का उपयोग किया गया है। इस मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा 12 वीं शताब्दी में शुरू किया गया था। परंतु किसी कारणवश कुतुबुद्दीन के शासनकाल में इस मीनार का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका।  इसके बाद इस मीनार का निर्माण इल्तुतमिश के द्वारा पूरा कराया गया।

मीनार की संरचना दिल्ली में बनी यह कुतुब मीनार लगभग 73 मीटर लंबी तथा 14.3 मीटर आधार के ब्यास तथा 2.7 मीटर शीर्ष व्यास वाली गुंबद हैं। इस घुम्मन में कुल  379 सीढ़ियां है। जिससे इस मीनार की ऊंचाई की भव्यता पता लगता है। यह मीनार प्रातः सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक खुलती है।

क़ुतुब मीनार का इतिहास कुतुबमीनार को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया है। यह मीनार भारत के प्रमुख पर्यटक केंद्रों में से एक है। इस मीनार को घूमने के लिए पर्यटक विदेशों से भी आते हैं। यह मीनार बहुमंजिला होने के साथ ही बहुत ऊंची मीनार है। इस मीनार में बहुत सुंदर नक्काशी की गई है। जो कि इस मीनार की सुंदरता को और भी बढ़ा देती है।

पर्यटक इस मीनार को देखने के साथ घूमने के लिए भी आते हैं। परंतु इस मीनार के ऊपर (अंदर)  जाने की अनुमति नहीं है। कुतुबमीनार में प्रवेश के लिए जो मुख्य द्वार है। उस द्वार को प्रशासन के द्वारा बंद कर दिया गया है। इस कारण इस मीनार के ऊपर नहीं जा सकते हैं।

माना जाता है। कि मीनार में बहुत छोटी सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है। इन सीढ़ियों के द्वारा अगर कोई ऊपर जाएगा तो एक बार में इन से एक व्यक्ति ही जा सकता है। इस मीनार के अंदर प्रकाश का कोई मुख्य स्त्रोत नहीं होने के कारण मीनार के अंदर हमेशा अंधेरा रहता है। इस कारण सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं है।

इस मीनार में कुछ घटनाएं घटित हो चुकी हैं। इसी के कारण किसी को मीनार के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। प्राचीन समय में भूकंप आने के कारण इस मीनार को क्षति पहुंची थी। परंतु उस समय के शासकों द्वारा इस मीनार को पुनः निर्मित करा दिया गया था।

एक बार जब भूकंप आया था। तब इस मीनार की ऊपरी मंजिलों को क्षति पहुंची थी। जिनका पुनः निर्माण कार्य फिरोजशाह के द्वारा कराया गया। इसके बाद एक बार और भूकंप के आ जाने के कारण यह मीनार क्षतिग्रस्त हुई थी। उस समय सिकंदर लोदी के द्वारा इसे पुनः निर्मित कराया गया था।

इस मीनार के किनारों को बेलनाकार तथा घुमाता आकृतियों से सुशोभित किया गया है। कुतुब मीनार के आधार में एक कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद है। कुतुबमीनार परिसर में लगभग 7 मीटर ऊंचा एक ब्राह्मी शिलालेख एवं लोहा स्तंभ है। मीना की दीवारों पर कुरान के पौराणिक शास्त्र की बातें लिखी हुई हैं।

आकर्षण का केंद्र प्राचीन समय से ही यह मीनार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। प्राचीन समय की मान्यता के अनुसार इस मीनार के सामने पीठ कर खड़े होकर लोहा स्तंभ की और चक्कर लगाने से व्यक्ति की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। शायद यही वजह है। कि हर साल देश दुनिया के हर क्षेत्र से यहां पर्यटक आते हैं।
कुतुबुद्दीन ऐबक के भारत आने के बाद उसने राजपूतों के साथ युद्ध करना आरंभ कर दिया था। एवं राजपूतों को हराने में सफल रहा। राजपूतों की हार पर अपनी विजय के जश्न में कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा इस अद्भुत एवं आकर्षक मीनार को बनवाने आदेश दिया। कुतुबमीनार के चारों ओर हरे-भरे पौधे बाला एक बगीचा है।

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