Essay on Beggar in Hindi आज की पोस्ट में हम भिखारी के बारे में जानेंगे। कि भिखारी अपने जीवन को किस प्रकार व्यतीत करता है। एवं उसे किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भिखारी बड़ी कठिनाइयों से अपने संपूर्ण जीवन को गुजारता है।
ऐसे व्यक्ति घर-घर जाकर लोगों से भीख मांगते हैं। और जो मिलता है। वह उसमें संतुष्ट रहते हैं। कई लोग भीख मांगकर अपने जीवन का गुजारा करते हैं। लेकिन भीख मांगना कोई सही बात नहीं है। क्योंकि समाज के लोगों भिखारियों को अपमान की दृष्टि से देखते हैं। लेकिन कई लोगों को वास्तव में भीख मांगनी पड़ती है। क्योंकि वह मानसिक तथा शारीरिक रूप से विकलांग होते हैं।
भीख देना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन भी उसी व्यक्ति को देना चाहिए। जो उसका पात्र है। लेकिन हमें भी देने से पहले उस भिकारी की हालत देख लेना चाहिए। कि वह उसका पात्र है या नहीं यदि भिखारी किसी तरह से लाचार या भीख का पात्र है। तो हमें उस व्यक्ति को भीख देना चाहिए। यदि हम किसी हट्टे कट्टे व्यक्ति को भीख देते हैं।
जो व्यक्ति अपने जीवन का गुजारा दूसरों से मांगी हुई वस्तुएं अथवा रुपए से करता है। जो नितदिन दूसरों पर आश्रित रहता है। वह उनसे भीख मांगता है। उसे भिखारी कहते हैं। जो व्यक्ति किसी भी प्रकार का श्रम नहीं कर सकता। उसे अपनी आजीविका चलाने के लिए मात्र एक सहारा (भीख मांगना खाना) रह जाता है।
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| Essay on Beggar in Hindi |
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उनके जीवन का एकमात्र सहारा भीख मांगना रह जाता है। इस वजह से वह भीख मांग कर अपना पेट पालते हैं। फिर भी कई लोग इन्हें चिल्लाकर भगा देते हैं। या ₹1, ₹2 दे देते हैं। लाचार भिकारी वाकई दया का पात्र होता है। क्योंकि वह किसी न किसी रूप से लाचार या बुजुर्ग होते हैं। इस वजह से उन्हें भीख मांगना पड़ता है।
लेकिन इसके बदले में उन्हें दूसरों के सामने बार-बार भीक देने के लिए कहना पड़ता है। इसके बदले में भिखारियों को उन लोगों के लिए ईश्वर से प्रार्थना तथा दुआएं करते हैं। यह भिखारी सड़क के किसी किनारे पर बेठे मिलते हैं।तथा यह भिखारी मंदिरों के सामने बड़ी तादाद में देखने को मिलते हैं। क्योंकि मंदिरों में धर्म करने वाले बड़ी संख्या में आते हैं।
इन भिखारीयों को भीख देकर पुण्य कमाते हैं। इस वजह से मंदिरों पर भिखारियों की तादाद बड़ी संख्या में देखी जाती है। हमारे देश में भिखारी बड़ी संख्या में निवास करते हैं। इन भिखारियों मैं कुछ भिखारी तो ऐसे भी होते हैं। जो मानसिक तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। फिर भी श्रम कर पैसा नहीं कमाना चाहते हैं। क्योंकि यही उनकी जॉब होती है।
उन्हें इसी तरह बिना श्रम किए खाने की आदत पड़ चुकी है। भिखारी यह सोचते हैं। कि आस्था के नाम पर किसी भी व्यक्ति को आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है। इस वजह से हमारे देश में भिखारियों की तादाद में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। कुछ भिखारी माथे पर तिलक लगाकर हाथों में भिक्षा का पात्र लेकर घर-घर मांगते हैं।
जिससे लोग उन्हें आसानी से भीख दे देते हैं। इस तरह के भिखारी भिख भी ऐसे मांगते हैं। जैसे कि वह भीख देने वाले व्यक्ति पर कृपा कर रहे हो। अगर वह व्यक्ति इस भिखारी को भीख नहीं देगा तो वह पाप का भागी बनेगा। हमने कुछ ऐसे भिखारी भी कभी ना कभी देखे होंगे जो दिन भर भिखारी का वेश धारण कर भीख मांगते हैं। और रात होते ही वह नशीले पदार्थों का सेवन करके सड़क किनारे मटकते हुए दिखेंगे।
भीख देना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन भी उसी व्यक्ति को देना चाहिए। जो उसका पात्र है। लेकिन हमें भी देने से पहले उस भिकारी की हालत देख लेना चाहिए। कि वह उसका पात्र है या नहीं यदि भिखारी किसी तरह से लाचार या भीख का पात्र है। तो हमें उस व्यक्ति को भीख देना चाहिए। यदि हम किसी हट्टे कट्टे व्यक्ति को भीख देते हैं।
इससे उसकी आदतें खराब होती हैं। और वह हमेशा भीख मांगता रहेगा । अधिकतर भिखारी अपने संपूर्ण जीवन भर भीख मांग कर आराम से जीवन व्यतीत करते हैं। और मिले पैसों से अपनी सोके पूरी करते हैं। वह तरह-तरह की नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। तथा लोगों के सामने लाचार तथा दीन दुखी बनने का नाटक करते हैं। फटे पुराने कपड़े पहन लेते हैं। नहाते भी नहीं है।
जिससे उनके शरीर से बदबू आती रहे और लोग उन्हें लाचार समझकर पैसे दे दे। इसी तरह एक एक रुपए मांग कर बहुत धन एकत्रित कर लेते हैं। समाज के भोले वाले लोगों की दया भावना का फायदा उठाते हैं। ऐसे व्यक्ति को कभी भी भीख नहीं देना चाहिए। क्योंकि स्वस्थ भिखारी को भीख देकर हम इसको और बढ़ावा देते हैं।
हमें उस भिखारी को भीख देना चाहिए जो किसी रूप से विकलांग हो। हमें भिखारी को भीख में हो सके तो खाने के लिए खाना तथा पहनने के लिए कपड़े देना चाहिए।यदि वह व्यक्ति काम करने में सक्षम हैं। तो हमें उस व्यक्ति की किसी तरह काम करने में मदद करना चाहिए। जिससे कि वह काम करके पैसा कमा सकें। हमे हमारे आसपास ऐसे भिखारी ज्यादा देखने को मिलते हैं।
जो हर तरह से स्वस्थ हैं। और श्रम कर पैसा कमा सकते हैं।परंतु उन्हें श्रम कर पैसा नहीं कमाना है। क्योंकि उन्हें जब बिना श्रम किए पैसे मिल जाते हैं। तो वह श्रम क्यों करेंगे। ऐसे लोगों को कभी भी भीख नहीं देना चाहिए। आज के इस दौर में भीख मांगना एक फैशन बन चुका है। हमने तीर्थ स्थलों पर देखा है। की भीख मांगने वाले भिखारियों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
हम जितने बड़े शहरों में देखें हमें वहां और भी प्रोफेशनल भिखारी देखने को मिलेंगे। जो एक बार आपको देख ले। फिर वह आपका पीछा नहीं छोड़ेंगे। और भीख लेकर ही मानते हैं । यदि हम ऐसे भिखारियों को एक दो रुपए भीख में देते हैं। तो यह भिखारी हमें वापस लौटा देते हैं।
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