Tuesday, 4 February 2020

ग्लोबल वार्मिंग पर जानकारी details on Global warming in Hindi

ग्रीन हाउस गैसों के कारण हो रहे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। जीवाश्म ईंधन जैसे गैस कोयले के जलने के कारण कार्बन  डाइऑक्साइड निकलती है। जो ग्रीन हाउस प्रभाव का मुख्य कारण है। यही कारण है। कि पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि होती जा रही है।

global warming kya hai – ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने से हमारी पृथ्वी की हरी भरी सुंदरता में कमी आती जा रही हैं। और पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। सुंदरता की कमी और भी कारण है। जैसा कि आपने देखा होगा कि कटाई की जा रही है। एवं शहरों का निर्माण किया जा रहा है।  शहरों के निर्माण के लिए हजारों पेड़ों को काट दियाा जाता

इसके अलावा सड़कों पर दौड़ता हुआ यातायात एवं बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाली जहरीली गैसे हमारे वायुमंडल को दूषित  कर रही हैं। समय के साथ बदलाव संसार का नियम परंतु आप जब 30 से 40 साल पहले के इस पृथ्वी के मौसम एवं तापमान पर नजर डालेंगे तो आपको आज के तापमान में काफी ज्यादा अंतर देखने को मिलेगा।

आज कल के मौसम हमने देखे हैं। की बरसात के मौसम में ना तो समय पर बरसात होती है। और ना ही ठंड एवं गर्मी के मौसम नियमित रहते हैं। मौसम में कभी बहुत अधिक ठंडे पड़ गई हैं। कभी बहुत कम ठंडी पड़ती हैं। पृथ्वी के मौसम परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण कारण पेड़ों की संख्या में लगातार हो रही कटौती है।

आज इसके बारे में जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है। तो चलिए पढ़ते हैं। पृथ्वी के तापमान में हो रही लगातार बढ़ोतरी या पृथ्वी के इस गर्म होने की प्रक्रिया को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग को जलवायु परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। जलवायु परिवर्तन का मतलब पृथ्वी के तापमान में होने वाले बदलाव है।

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव Side effects of global warming – ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के पर्यावरण के तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही है। और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमें नई नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की मुख्य समस्या का कारण वायुमंडल में एकत्रित हुई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा है। जो कि हमारी पृथ्वी से गर्मी को बाहर नहीं जाने देती है। जब हम कोयला तेल टइत्यादि को जलाते हैं।

इनके परिणाम स्वरूप कारण उत्पन्न होती है। जो कि एक चादर की परत के जैसा कार्य करती है। जो कि पृथ्वी की सतह को ढक लेती है।ट और गर्मी अंदर कैद हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न होती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बारिश के मौसम चक्र में बदलाव आता जा रहा है। गर्मियों के मौसम नियमित नहीं रहे हैं। जिसके कारण कुछ हिस्सों में बहुत अधिक सूखे का सामना करना पड़ रहा है। 

जिसके कारण देश-विदेश की कई जगह ऐसी हैं। जहां पर खेती करना असंभव हो गया है। पृथ्वी का तापमान बढ़ने के परिणाम स्वरूप ग्लेशियरों के पिघलने की संख्या में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके कारण बहुत से देशों को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। ग्रीन हाउस गैसों के कारण हमारे पर्यावरण में अनेक प्रकार की विषैली गैस उत्पन्न हो गई हैं। जिसके कारण कई प्रकार की पशु पक्षियों की प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर है। 

ग्रीन हाउस गैसों के कारण विभिन्न प्रकार की एलर्जी त्वचा रोगों की समस्या उत्पन्न हो गई है। हमारे पर्यावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से सांस लेने मैं परेशानी की समस्या के साथ और भी कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्र का जल स्तर बढ़ने के कारण समुद्र में रहने वाले जलीय जीवो के जीवन पर  बुरा असर पड़ रहा है।
सूरज की रोशनी के साथ आने वाली पराबैगनी किरने वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत की सतह कुछ पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर लेती हैं। और शेष बची किरणे वायुमंडल से गुजरती हैं। पृथ्वी के सतह वातावरण में रेडिएशन दर्शाती हैं। वायु मंडल में उपस्थित ग्रीन हाउस गैसें पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर लेते हैं। 

जिसके परिणाम स्वरूप वातावरण गर्म हो जाता है। वह गैसे जो थर्मल इंफ्रारेड रेडिएशन अवशोषत करने की क्षमता रखती हैं। वह ग्रीन हाउस गैसें कहलाती हैं। जैसे CO2 H2O N2O CH4 O3 यह गैसे एक ग्रुप के रूप में रहती हैं। और इंफ्रारेड रेडिएशन अवशोषित करती हैं। परंतु इन गैसो की मात्रा में बहुत अधिक वृद्धि के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हुई है। क्योंकि कुछ  दशक से औद्योगिक क्षेत्र में काफी अधिक संख्या में वृद्धि हुई है। 

जिसके परिणाम स्वरूप कोयला तेल आदि ईधन के उपयोग से ग्रीन हाउस गैस से विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कार्बनमोनोऑक्साइड ऑक्सीजन नाइट्रोजन अमोनिया मीथेन एक निश्चित मात्रा में थी। लेकिन मानव समुदाय की गतिविधियों के कारण इन गैसों में असंतुलन हुआ है।

जिसके फलस्वरूप वायु में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी हुई है। एवं अन्य गैसों की मात्रा में वृद्धि हुई है। ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि के कारण ओजोन परत जो कि सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों को रोकती है। में गिरावट आई है।

ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम– Prevention of global warming ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम के लिए हमें आवश्यकता है। कि हर देश के नागरिक इसके प्रति जागरूक हो की ग्लोबल वार्मिंग क्या है। और कैसे होता है।अगर नागरिक इसके प्रति जागरूक होंगे तो इससे ग्लोबल वार्मिंग के रोकथाम में बहुत अधिक मदद मिलेगी। इस पृथ्वी के संरक्षण के लिए हमें वातावरण को जितना संभव हो कम  प्रदूषण करना चाहिए। 

पर्यावरण के असंतुलन के लिए मानव समुदाय जिम्मेदार है। इससे बचने के लिए हमें कार्बन फुटप्रिंट को कम करना चाहिए। हमें सीएफसी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) गैसों के उत्सर्जन को कम करना चाहिए। जोकि एसी फ्रिज इत्यादि मशीनों के उपयोग को कम करके रोका जा सकता है। वाहनों से निकलने वाला धुआ बहुत हानिकारक होता हैं।
क्योंकि उसके द्वारा निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड से हमारे पर्यावरण में गर्मी बढ़ रही है। हमारे पर्यावरण के लिए प्लास्टिक एक अभिशाप है।  ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए हमें आवश्यकता है। कि हम प्लास्टिक का जितना हो सके उतना कम उपयोग करें। उपयोग नहीं करें तो अच्छा।
प्लास्टिक या पॉलीथिन ऐसी वस्तु हैं। जिन को जलाने के बाद भी यह पूर्णता नष्ट नहीं होती है। और पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए इसका उपयोग करने से हमें बचना चाहिए।
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