मैं अपने काम से दूसरे शहर गया हुआ था। मैं रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे स्टेशन के समीप खड़ा ही हुआ। की तभी मुझे पीछे से आवाज आती है। की साहब 2 दिन से कुछ नहीं खाया कुछ खाने को दे दो भगवान आपका भला करेगा। जब मैंने उसकी भिखारी की और देखा तो वास्तव में उसकी हालत दयनीय थी।
फटे पुराने कपड़े पहने हुए शरीर में बदबू आ रही थी। लंबे-लंबे गंदे बाल पतला दुबला शरीर एक पेर से लाचार था। स्टेशन पर आते जाते सभी लोगों से भीख मांग रहा था। मुझे उसकी हालत देखकर बहुत तरस आ गया। सबसे पहले मैंने उस भिखारी को खाना खिलाया। तथा इस भिकारी को कपड़े दिलवाए। वह बहुत खुश हुआ। मैंने उस भिखारी से पूछा कि आप जन्म से भिखारी हो।
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मेरी यह बात सुनकर भिखारी रोने लगा और रोते रोते कहा साहब में जन्म से भिखारी नहीं था। तो मैंने पूछा तो फिर यह सब कैसे हुआ तब इस व्यक्ति ने मुझे अपनी आपबीती सुनाई इस कमबख्त पैर ने मुझे भिखारी बना दिया। कुछ साल पहले में एक सामान्य इंसान की तरह अपना जीवन व्यतीत करता था। अपनी पत्नी तथा बच्चों का पेट पाल रहा था।
मैं एक छोटे से गांव में रहता था। कुछ समय तक मैंने अपने गांव में काम किया। वहां पर कभी-कभी काम नहीं मिलता था। इसलिए मैं अपने पत्नी तथा बच्चों को लेकर शहर आ गया। क्योंकि गांव में मेरी कमाई का एक मात्र साधन मजदूरी थी। वह भी रोज नहीं मिलती थी। और मात्र एक घर था। इस गांव में मेरा और कोई भी नहीं था। इसलिए मैं शहर आ गया और आकर मैंने एक कमरा किराए पर ले लिया।
यहां पर अच्छे से काम की तलाश में मैं कई दिनों तक घूमता रहा लेकिन मुझे कोई काम नहीं मिला। तब मैंने सोचा कि कुछ ना कुछ काम तो करना पड़ेगा। तब में अन्य मजदूरों के साथ चौराहे पर खड़ा हो जाता था। वहां पर और भी बहुत सारे मजदूर सुबह-सुबह खड़े रहते थे। और मुझे किसी किसी दिन काम मिल जाता था। जिससे मैं अपना तथा अपने परिवार का पेट पाल रहा था। साथ ही में अच्छे काम की तलाश भी कर रहा था। और कुछ ही समय बाद मुझे एक काम मिल गया।
मैं वहां काम करने लगा और मैं बहुत खुश था। लेकिन एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। मैं अपने पूरे परिवार के साथ घूमने के लिए गया था। लेकिन हम जिस बस में जा रहे थे। वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें मैंने मेरे परिवार को खो दिया। इस दुर्घटना में मेरा एक पैर चला गया। मेरी पत्नी तथा बच्चों के अलावा मेरा इस दुनिया में और कोई भी नहीं था।
मैं कुछ महीनों तक अस्पताल में ही रहा और जब मैं घर पहुंचा तो मेरे पास किराया देने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने वह घर खाली कर दिया। अब मेरे पास खाने तथा रहने के लिए कोई भी जगह नहीं थी। तीन दिन गुजर गए थे। मैं भूखा रहा लेकिन किसी भी व्यक्ति ने मेरी कोई मदद नहीं की। मैं अपने जीवन से बहुत परेशान हो गया था। और आखिरकर मैं सोच रहा था।
कि अब मेरा इस दुनिया में जीने का कोई मकसद नहीं रहा। लेकिन मैंने एक पल बाद सोचा कि इस तरह मरना किसी गुनाह से कम नहीं है। मेरे इस पैर की वजह से कोई मुझे काम देने के लिए भी तैयार नहीं था। फिर मैंने सोचा कि अपने जीवन का गुजारा करने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।
इसलिए मैंने आखिरी रास्ता भीख मांगना अपनाया और अब मैं यहीं बैठकर भीख मांगता हूं। कई लोग भीख दे देते हैं। तो कई लोग चिल्लाकर चले जाते हैं। लेकिन साहब आप पहले इंसान हो जिन्होंने मुझ जैसे भिखारी का हाल पूछा। मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद। भिखारी की आपबीती सुनकर मैं दंग रह गया। और यह सभी बातें बोलकर वह फिर से रोने लगा।
भिखारी अपने बीते हुए अतीत को वापस याद कर बहुत दुखी हुआ। उस भिखारी की आपबीती सुनकर मेरी आंखें नम हो गई। मैंने सोचा कि इस बेचारे इंसान की जिंदगी एक घटना ने पूरी बदल कर रख दी। मुझसे जितनी बनी मैंने उस भिखारी की मदद की। मैं बहुत प्रसन्न था। कि ईश्वर ने मुझे इस लायक बनाया की मैं दूसरों की मदद कर सकूं । जीवन की एक घटना ने इस इंसान को वाकई कहां से कहां लाकर खड़ा कर दिया।
हमें ऐसे लाचार लोगों की मदद करना चाहिए। जो लाचार और असहाय है। उन लोगों की मदद के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।यदि हमें ऐसा कोई भी भिखारी देखने को मिलता है। तो हमें उसे कभी भी बिना वजह जाने डांटकर नहीं भगाना चाहिए। क्योंकि उस बेचारे व्यक्ति पर क्या गुजरेगी इस बात का हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
आशा करता हूं। कि आपको हमारे द्वारा लिखी गई यह पोस्ट भिखारी की आत्मकथा निबंध Bhikhari ki Atmakatha in Hindi पसंद आई होगी। यदि पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें। एवं इसी तरह की और पोस्टों को अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं। तो हमें सब्सक्राइब अवश्य करें। अपना कीमती एवं बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।
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| Bhikhari ki Atmakatha in Hindi |
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मेरी यह बात सुनकर भिखारी रोने लगा और रोते रोते कहा साहब में जन्म से भिखारी नहीं था। तो मैंने पूछा तो फिर यह सब कैसे हुआ तब इस व्यक्ति ने मुझे अपनी आपबीती सुनाई इस कमबख्त पैर ने मुझे भिखारी बना दिया। कुछ साल पहले में एक सामान्य इंसान की तरह अपना जीवन व्यतीत करता था। अपनी पत्नी तथा बच्चों का पेट पाल रहा था।
मैं एक छोटे से गांव में रहता था। कुछ समय तक मैंने अपने गांव में काम किया। वहां पर कभी-कभी काम नहीं मिलता था। इसलिए मैं अपने पत्नी तथा बच्चों को लेकर शहर आ गया। क्योंकि गांव में मेरी कमाई का एक मात्र साधन मजदूरी थी। वह भी रोज नहीं मिलती थी। और मात्र एक घर था। इस गांव में मेरा और कोई भी नहीं था। इसलिए मैं शहर आ गया और आकर मैंने एक कमरा किराए पर ले लिया।
यहां पर अच्छे से काम की तलाश में मैं कई दिनों तक घूमता रहा लेकिन मुझे कोई काम नहीं मिला। तब मैंने सोचा कि कुछ ना कुछ काम तो करना पड़ेगा। तब में अन्य मजदूरों के साथ चौराहे पर खड़ा हो जाता था। वहां पर और भी बहुत सारे मजदूर सुबह-सुबह खड़े रहते थे। और मुझे किसी किसी दिन काम मिल जाता था। जिससे मैं अपना तथा अपने परिवार का पेट पाल रहा था। साथ ही में अच्छे काम की तलाश भी कर रहा था। और कुछ ही समय बाद मुझे एक काम मिल गया।
मैं वहां काम करने लगा और मैं बहुत खुश था। लेकिन एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। मैं अपने पूरे परिवार के साथ घूमने के लिए गया था। लेकिन हम जिस बस में जा रहे थे। वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें मैंने मेरे परिवार को खो दिया। इस दुर्घटना में मेरा एक पैर चला गया। मेरी पत्नी तथा बच्चों के अलावा मेरा इस दुनिया में और कोई भी नहीं था।
मैं कुछ महीनों तक अस्पताल में ही रहा और जब मैं घर पहुंचा तो मेरे पास किराया देने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने वह घर खाली कर दिया। अब मेरे पास खाने तथा रहने के लिए कोई भी जगह नहीं थी। तीन दिन गुजर गए थे। मैं भूखा रहा लेकिन किसी भी व्यक्ति ने मेरी कोई मदद नहीं की। मैं अपने जीवन से बहुत परेशान हो गया था। और आखिरकर मैं सोच रहा था।
कि अब मेरा इस दुनिया में जीने का कोई मकसद नहीं रहा। लेकिन मैंने एक पल बाद सोचा कि इस तरह मरना किसी गुनाह से कम नहीं है। मेरे इस पैर की वजह से कोई मुझे काम देने के लिए भी तैयार नहीं था। फिर मैंने सोचा कि अपने जीवन का गुजारा करने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।
इसलिए मैंने आखिरी रास्ता भीख मांगना अपनाया और अब मैं यहीं बैठकर भीख मांगता हूं। कई लोग भीख दे देते हैं। तो कई लोग चिल्लाकर चले जाते हैं। लेकिन साहब आप पहले इंसान हो जिन्होंने मुझ जैसे भिखारी का हाल पूछा। मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद। भिखारी की आपबीती सुनकर मैं दंग रह गया। और यह सभी बातें बोलकर वह फिर से रोने लगा।
भिखारी अपने बीते हुए अतीत को वापस याद कर बहुत दुखी हुआ। उस भिखारी की आपबीती सुनकर मेरी आंखें नम हो गई। मैंने सोचा कि इस बेचारे इंसान की जिंदगी एक घटना ने पूरी बदल कर रख दी। मुझसे जितनी बनी मैंने उस भिखारी की मदद की। मैं बहुत प्रसन्न था। कि ईश्वर ने मुझे इस लायक बनाया की मैं दूसरों की मदद कर सकूं । जीवन की एक घटना ने इस इंसान को वाकई कहां से कहां लाकर खड़ा कर दिया।
हमें ऐसे लाचार लोगों की मदद करना चाहिए। जो लाचार और असहाय है। उन लोगों की मदद के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।यदि हमें ऐसा कोई भी भिखारी देखने को मिलता है। तो हमें उसे कभी भी बिना वजह जाने डांटकर नहीं भगाना चाहिए। क्योंकि उस बेचारे व्यक्ति पर क्या गुजरेगी इस बात का हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
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