Tuesday, 4 February 2020

बादल की आत्मकथा हिंदी निबंध Badal ki atmakatha essay in hindi

मैं बादल आसमान में तैरता फिरता हूं। कभी यहां तो कभी वहां घूमता फिरता रहता हूं। मेरा रूप  निराला है। कहीं छोटे आकार में तो कहीं विशाल आकार में रहता हूं। मेरा कोई निश्चित आकार नहीं है। समय तथा वायु की गति के साथ मेरा आकार छोटा तथा बड़ा होता रहता है।

मेरा जन्म पानी तथा बर्फ के छोटे-छोटे कणों से मिलकर होता है। मैं जीवन भर एक स्थान से दूसरे स्थान पर सैर करता फिरता हूं। मेरे साथ कई प्रकार के पक्षी उड़ते हुए जाते हैं। हवाई जहाज की सैर करने वाले यात्री मुझे बहुत करीब से देख पाते हैं। एवं मेरी शीतलता को महसूस कर उस का आनंद लेते हैं। हवाई जहाज में बैठे लोग मुझे देख प्रसन्न हो जाते हैं।
Badal ki atmakatha essay in hindi
मेरे नजदीक से बहुत सारे हेलीकॉप्टर तथा हवाई जहाज प्रतिदिन गुजरते हैं। जिनमें बहुत सारे यात्री यात्रा करते हैं। तथा मुझे देखकर प्रसन्न होते हैं। और हवाई जहाज मैं यात्रा करते समय मेरी फोटो खींचते हैं। बरसात के मौसम में मेरा रूप और भी सुंदर हो जाता है। कहीं सफेद रंग तो कहीं नीला रंग में धारण करता हूं।

बरसात के मौसम में जब मैं जल बरसाता हूं। तो लोग मेरी छोटी छोटी बूंदों को देख प्रसन्न हो जाते हैं। और अपने घरों से निकलकर उन बूंदों में आकर बरसात का आनंद लेते हैं। जब मैं बसंत के आगमन पर जल बरसाता हूं। तो मनुष्य ही नहीं अपितु पशु-पक्षी मुझे देख कर झूमने लगते हैं। एवं प्रवासी पक्षी अपने घर वापस आ जाते हैं।

मुझे देख मनुष्य बहुत प्रसन्न हो जाता है।क्योंकि मैं खेती के लिए उपयोगी हूं। मै प्रत्येक जीव के लिए उपयोगी हूं। मुझे जल बरसाता देख सबसे अधिक खुशी मोर पक्षी को होती है। जब मैं बरसात कराता हूं। तो मोर मुझे देख बहुत प्रसन्न होती है। और अपनी प्रशंसा को दिखाने के लिए वह तरह तरह के नृत्य करने लगती है।

साथ ही अन्य पक्षी भी अपनी खुशी मैं फूले नहीं समाते  है। इन पक्षियों तथा मनुष्य को इतना खुश देख कर मैं बहुत खुश होता हूं। मोर के नृत्य को देखकर मेरा मन प्रसन्न हो जाता है। इसे देख मुझे ऐसा लगता है। कि मैं जल बरसाता जाऊं। लेकिन मैं कभी-कभी आवश्यकता से अधिक जल बरसाता हूं।

तब वहां के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उनकी फसले  नष्ट हो जाती है। इस कारण वह मुझसे नाराज हो जाते हैं। उनका नाराज होना भी सही है। क्योंकि उन्हें खाने तथा पीने के लिए पानी की चिंता सताती है। आवश्यकता से अधिक जल बरसाने के कारण पशु पक्षियों का जीना भी  मुश्किल हो जाता है। पक्षियों को भी खाना ढूंढने में दिक्कत होती है।

लेकिन मेरा जल बरसाना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि मैं बरसात नहीं कराऊंगा तो इनकी मुश्किलें और भी बढ़  सकती हैं। मुझे बरसात कराता देख नदी, नाले, तालाब तथा झीले बहुत प्रसन्न होती हैं। एवं इन पर आश्रित रहने वाले लोग मेरा धन्यवाद करते हैं। इस बात से मैं बहुत प्रसन्न होता हूं।

गर्मियों के दिनों में मुझे नितदिन एक ही काम रहता है। एक स्थान से दूसरे स्थान  की सैर करना। गर्मियों के दिनों में घूमते-घूमते मुझे  बहुत बच्चे खेलते हुए दिखते हैं। जिन्हें देखकर मैं बहुत प्रसन्न होता हूं। जब बच्चे तरह-तरह के कलर की पतंग उड़ाते हैं।

 तो उन्हें देख मैं बहुत प्रसन्न होता हूं। तथा गर्मियों के दिनों में मेरा कलर  सूर्य अस्त के समय सूरज की रोशनी के कारण लाल भी दिखाई देता है। जो लोगों को बहुत भाता है। बरसात के दिनों में लोग मेरे नीले कलर को देखकर अनुमान लगा लेते हैं। कि अब बरसात होगी। लेकिन यह अनुमान कभी-कभी गलत भी हो जाता है।

 परंतु मौसम विभाग वाले मेरी गति तथा आकार को देखकर वह पूर्व अनुमान लगा लेते हैं।  बरसात कब और कहां पर होगी। लेकिन कभी-कभी तेज  गति के कारण मेरी दिशा परिवर्तित  हो जाती हैं। जिसके कारण में एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित हो जाता हूं। बरसात के मौसम मैं तेज ध्वनि उत्पन्न करता हूं। जिससे बहुत सारे लोग डर जाते हैं।

खासकर बच्चे मेरी ध्वनि से भयभीत हो जाते हैं। मेरे तेज गरजने से लोग मुझसे नाराज हो जाते हैं। लेकिन मैं बादल हूं। और मेरा तो काम ही है। मैं अपने जीवन में बहुत खुश हूं। क्योंकि मैं हर प्रकार के जीव को जीवनदायिनी जल प्रदान करता हूं। जो हर एक मनुष्य तथा जीव जंतु के लिए  बहुत महत्वपूर्ण है। किसी ने खूब कहा है। जल है तो कल है, जल ही जीवन है।

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